संभोग

"संभोग से तात्पर्य दो शक्तियों अथवा व्यक्तित्व का आपस में स्वैच्छिक मिलन अर्थात समागम रत होकर एक-दूसरे का सामान रूप से भोग करने से है।"

आचार्य उदय

1 comment:

Tarkeshwar Giri said...

लेकिन होता ये हैं सम्भोग कि जगह लोग उसका उपयोग करने लगते हैं.