आत्मसंतुष्टि

"प्रतिदिन एक ऎसा कार्य अवश्य करें जिसके परिणाम स्वरूप आत्मसंतुष्टि प्राप्त हो।"

आचार्य उदय

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

गाँठ मन में बाँध ली ।

रवि कान्त शर्मा said...

जब तक मनुष्य स्वयं की पहचान अपने शरीर के रूप में करता रहेगा तब तक वह जो कुछ भी कार्य करेगा वह केवल शरीर-तुष्टि के लिये ही होगा।.........

जब कोई मनुष्य स्वयं की पहचान आत्मा के रूप में कर लेता है तब वह जो कुछ भी करता है वह सब आत्म-तुष्टि के लिये ही करता है।........

हर्षिता said...

बहुत ही सही बात कही आपने,धन्यवाद।