कल्पनाएँ

"कल्पनाएँ सदैव ही रोचक व मनभावन होती हैं।"

आचार्य उदय

4 comments:

रवि कान्त शर्मा said...

आचार्य जी, सत्य बचन! कल्पना ही साकार होती हैं। परन्तु मानव जीवन तभी सफ़ल होता है कि कल्पनायें भौतिक न होकर आध्यात्मिक हों।

प्रवीण पाण्डेय said...

अभ्यास से कुछ भी संभव है ।

jamos jhalla said...

लेकिन कल्पनाएँ तब तक केवल कल्पनाएँ ही रहती हैं जब तक इन्हें साकार करने को ठोस प्रयास ना किये जायें

पंकज मिश्रा said...

जय गुरुदेव!