सृजन

"स्त्री-पुरुष की संरचना व उत्पत्ति नवीन सृजन के द्रष्ट्रिकोण से की गई है इसलिये ही वे एक दूसरे के पूरक हैं।"

आचार्य उदय


3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

उत्पत्ति का ध्येय मन में सदैव लेकर चलना चाहिये, इससे पूरकता और प्रेम बढ़ेगा ।

रवि कान्त शर्मा said...

इस भौतिक जगत में प्रत्येक वस्तु अपूर्ण है उसकी पूर्णता विलोमता से ही है।

दिगम्बर नासवा said...

बहुत अच्छे ... सत्य वचन ...