कल क्या है !

कल क्या है, कल किसने देखा है, कल का कल देखेंगे, कल के सपने देखना बंद करो, कल के चक्कर में आज खराब मत करो ... ऎसे बहुत सारे प्रश्न हैं जिन पर समय-बे-समय चर्चा होते रहती है।

आज हम इन संपूर्ण सवालों पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करते हैं, सर्वप्रथम कल, आज, और कल पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहेंगे ... कल अर्थात अतीत जो गुजर गया, भूतकाल ... आज अर्थात जो चल रहा है, वर्तमान ... कल अर्थात जो आने वाला है, भविष्य ... मनुष्य जीवन के ये तीन महत्वपूर्ण चक्र हैं भूत, वर्तमान, भविष्य।

भूत अर्थात गुजरा हुआ कल जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता ... गुजरी हुई होनी-अनहोनी, लाभ-हानि, सुख-दुख, उतार-चढाव ये सब हमें अतीत की याद दिलाते हैं जो साक्षात मनुष्य जीवन के गुजरे हुए पल हैं ... इन से कोई इंकार नहीं कर सकता।

आज अर्थात वर्तमान, जो हो रहा है, जिसे हम जी रहे हैं, जो महसूस कर रहे हैं, अच्छा-बुरा, इधर-उधर, भागम-भाग, लेना-देना, रोना-गाना, जीना-मरना ... ये वर्तमान है जिसे हम अपनी आंखों के सामने देख रहे व महसूस कर रहे हैं।

अब हम आने वाले कल अर्थात भविष्य पर प्रकाश डालते हैं, ... कल क्या है, जो अगले क्षण होने वाला है वही कल है ... कल किसने देखा है, हम ने देखा है - हम देखेंगे, क्या हम इंकार कर सकते हैं कि हम बचपन से ही आने वाले कल को देखते हुये नहीं आ रहे हैं।

कल का कल देखेंगे, उचित है यह कहना, पर कितना, ऎसे कितने मुर्ख या बुद्धिमान हैं जो कल की रणनीति आज बना कर नहीं चलते, शायद बहुत कम लोग हों, लगभग प्रत्येक समझदार आने वाले कल की योजनाएं बना कर चलता है, आज की मजबूत बुनियाद पर ही कल मजबूत इमारत खडी हो सकती है।

कल के सपने देखना बंद करो, कल के चक्कर में आज खराब मत करो, क्यों - किसलिये ... आने वाले कल की योजनाएं व सपने जितने सुनहरे होंगे संभवत: आने वाला कल भी उतना ही सुनहरा होगा ... इसलिये यह आवश्यक है कि हम कल की ओर सदैव सचेत व सकारात्मक रहें।

जिस प्रकार हम अतीत व वर्तमान से इंकार नहीं कर सकते ठीक उसी प्रकार आने वाले कल से भी इंकार नहीं किया जा सकता ... आने वाले कल को सपने की तरह अपनी अपनी आंखों में संजोकर रखना मनुष्य जीवन का महत्वपूर्ण पहलु है।

जय गुरुदेव

आचार्य 'उदय'

10 comments:

boletobindas said...

आप आए मगर अपना संसारी चेहरा हमसे छुपा कर रखना चाहते हैं आचार्य श्री। मैने तो आपसे कहा था कि भई हम मूर्ति पूजा करते हैं। बिना मूर्ति के विश्वास नहीं होता। पर लगता है आप प्रगट नहीं होना चाहते हमारे सामने। आपने लंबा परिचय दे दिया पर छुपाते हुए। आप की तरह मैं कहां से आया हूं मुझे नहीं पता और न ही जानना चाहता हूं। हां इस संसार में अगर कुछ है विचार में तो उसी परमात्मा का दिया हुआ है। जाहिर है फिर उसी परमात्मा में समा जाउंगा। कुछ पाप के कारण कुछ देर से सही। आपने अपने अंदर छिपे तत्व को पहचान लिया हम तो अहसास भी खैर नहीं कर पा रहे। हम तो कल के लिए क्या सचैत हों पाएंगे हम तो आज को ही लेकर चिंता में डूबे रहते हैं। आज तो क्या हम तो अब को लेकर भी चिंचित होते रहते हैं। कल के बारे में सोचने की आदत से भी लाचार हैं। क्या करें आम इंसान ठहरे। बस इतना पता है कल अच्छा था सो आज कुछ अच्छा है। आज अच्छा होगा तो कल भी होगा। इसी उधेड़बुन में हम सधारण सोच के साथ सधारण क्रियाकलापों में लगे हुए संधारण इंसान हैं।

सूर्यकान्त गुप्ता said...

जय गुरुदेव ! किन्तु आचार्य। आने वाला कल तो आज हो जाता है। याने टुमारो नेव्हर क्म्स्।

संजय भास्कर said...

जय गुरुदेव
आचार्य श्याम कोरी 'उदय' ji

राजीव तनेजा said...

अरे उदय जी ...आपने मेरे ज्ञान चक्षु ही खोल दिए...
अब अपने आने वाले कल की योजना बनाता हूँ...
उत्तम विचार... बढ़िया आलेख

Udan Tashtari said...

जय हो!!! आभार इतने बेहतरीन सदविचारों के लिए.

Babli said...

बहुत ही सुन्दर विचार के साथ अति उत्तम और शानदार आलेख! बधाई!

दिगम्बर नासवा said...

धन्य है उदय जी आप ... आपकी माया अपरंपार है ... कल आज और कल का ज्ञान हो गया ...

kshama said...

Ab bhi samajh me nahi aa raha..guzre kal se kuchh seekh len,yaa use bhoolkar aage badhen...!

पापा जी said...

सादर प्रणाम

ललित शर्मा said...

अहो!बहुत सुंदर भाव है आपका।

बस इन्ही भावों का व्यवहार हो।
जीवन सुंदर हो संग सदाचार हो।

आभार