मैं कौन हूं !

मैं कौन हूं, मेरा परिचय क्या है, मेरी तस्वीर क्या है, कहां से आया हूं, क्या चाहता हूं, ऎसे बहुत प्रश्न आपके मन में हैं और आप सभी इन प्रश्नों के उत्तर भी जानना चाहते हैं।

मैं एक नश्वर ऊर्जा पुंज हूं, मेरे शब्द व भाव ही मेरा परिचय हैं, जो आप महसूस कर रहे हो एवं महसूस कर सकते हो वह ही मेरी तस्वीर है, न कहीं से आया हूं और न ही कहीं जाना चाहता हूं।

मैं आपके मन में, भावनाओं में, इच्छाओं में, कल्पनाओं में, फ़ूलों की खुशबू में, पवन के झौंके में, अग्नि के ताप में, संभोग की तृप्ति में, प्रकृति की छांव में, बारिश की रिमझिम में, बच्चों की मुस्कान में, युवाओं की चाहत में, बुजुर्गों के आशीर्वाद में ... इन सभी में हूं।

आचार्य जी

10 comments:

सूर्यकान्त गुप्ता said...

प्रभू….…………………………………………………………………!

दिगम्बर नासवा said...

Dhany prabhoo ..
aapne sabke parichay mein apn parichay de diya ... kaash hamaaya bhi parichay aisa ho sake ...

aapko mil kar achhaa laga ..

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अच्छा लगा आपके बारे मं जानकर।
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रूपसियों सजना संवरना छोड़ दो?
मंत्रो के द्वारा क्या-क्या चीज़ नहीं पैदा की जा सकती?

पापा जी said...

प्रणाम गुरुदेव

हर्षिता said...

मैं कौन हूं पर अच्छा लिखा है आपने।

Arvind Mishra said...

वाह ,कितना बढियां !

संजय भास्कर said...

प्रणाम गुरुदेव

अच्छा लिखा है आपने।

Satyawati Mishra said...

Acharyaji,

App nashwar urjapunj na kahe, balki avinashi urja kahe/

Baki sara bahut achha hai

milne aur baat karne ki ichchha hai, sambhav ho to google talk par sampark hetu
satyawati405 @ google. com
par sampark kare

सौरभ आत्रेय said...

क्या ये आपका परिचय है?

आप फूलो की खुशबू, अग्नि के ताप आदि में किस प्रकार से हैं इसको जरा प्रमाणित करने का कष्ट करेंगे.

यदि आप अपने आपको ईश्वर मानते हैं तो उसको भी प्रमाणित करके दिखाइए.क्योंकि बिना प्रमाण के बातो का मानना बुद्दी का कार्य नहीं है.

आचार्य की संज्ञा से आप अपने आप को संबोधित कर रहे हैं या ...?

सौरभ आत्रेय said...

मेरी उपरोक्त टिप्पणी किसी द्वेष भाव से नहीं लिखी गयी है केवल मैं सच जानना चाहता हूँ एक स्वस्थ वाद के द्वारा.