लकीरें

"जो रीति-नीति, धर्म-कर्म, आचार-व्यवहार, इंसानों के बीच में लकीरें खींच दें वह अनुशरण के योग्य नहीं हो सकते।"
आचार्य उदय

मंथन से ही सृजन संभव है !

"जिंदगी में नियमित उजाले इंसान को लापरवाह बनाते हैं ..... होता ये है कि जब सब कुछ ठीक चलते रहता है तब इंसान कुछ अलग करने के विषय में नहीं सोचता वरन वह वर्तमान व्यवस्थाओं से ही संतुष्ट हो जाता है, जबकि उतार-चढाव इंसान को उनसे लडने,जूझने और नया सृजन करने हेतु नये विचार मन में जागृत करते हैं, जब विचार जागृत होंगे तब ही इंसान कुछ नया करने के लिये मंथन करेगा ..... मंथन से ही सृजन संभव है .... सच कहा जाये तो प्रत्येक अविष्कार की आधारशिला मंथन ही है, मंथन से कुछ करने के लिये सिर्फ़ दिशा का निर्धारण नहीं होता वरन रूपरेखा व लक्ष्य का निर्धारण कर लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग भी प्रशस्त होता है।"
जय गुरुदेव
आचार्य उदय

प्रार्थना

प्रार्थना से तात्पर्य किसी आवश्यकता की प्राप्ति हेतु अनुरोध करना है, यह अनुरोध प्रत्येक मनुष्य करता है जब कभी भी उसे कुछ विशेष पाने की चाह होती है वह अपने अपने ढंग से अनुरोध अवश्य करता है।

जब किसी मनुष्य को यह प्रतीत होता है कि अमुक सामने वाला व्यक्ति उसके अनुरोध की पूर्ति कर सकता है तब वह उस व्यक्ति से आवश्यकता की पूर्ति हेतु प्रत्यक्ष रूप से अनुरोध कर लेता है किन्तु जब उसे यह जानकारी नहीं होती कि उसकी आवश्यकता की पूर्ति करना किसके हाथ में है तब वह ईश्वर से प्रार्थना करता है।

ईश्वर, ईष्ट देव, गुरु, कुदरती शक्ति प्राप्त किसी व्यक्तित्व के समक्ष जब इंसान प्रार्थना करता है तब उसे इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिये कि प्रार्थना नाम,यश,कीर्ति,सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिये होना चाहिये, न कि मन में बसे किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिये।

संभव है ईश्वर ने आपके लिये, आपके द्वारा प्रार्थना में चाहे गए "विशेष उद्देश्य" से हटकर "कुछ और ही लक्ष्य" निर्धारित कर रखा हो, ऎसी परिस्थिति में प्रार्थना में चाहे गए लक्ष्य तथा ईश्वर द्वारा आपके लिये निर्धारित लक्ष्य दोनों समय-बेसमय आपकी मन: स्थिति को असमंजस्य में डालने का प्रयत्न करेंगे।

इसलिये मेरा संदेश मात्र इतना ही है कि जब भी आप प्रार्थना करें नाम, यश, कीर्ति, सुख - समृद्धि प्राप्ति के लिये ही करें।
जय गुरुदेव

आचार्य उदय

महान

“यह आवश्यक नहीं कि वह व्यक्ति ही महान है जो समाज में चर्चित है।”

आचार्य उदय

गुलाम

“लालच व बेइमानी अदभुत शक्तियाँ हैं जो मनुष्य को अपना गुलाम बना लेती हैं।”

आचार्य उदय

धर्म

" भूख, नींद, सेक्स, जन्म, मृत्यु का कोई धर्म नहीं है।"

आचार्य उदय

ईमानदारी

“बेईमानी सरल है दूसरों के साथ करना है किंतु ईमानदारी कठिन है स्वयं के साथ करना है।”

आचार्य उदय