अनमोल

"मान, मर्यादा प्रतिष्ठा अनमोल है जिसके समक्ष दुनिया की सारी दौलत छोटी पड़ जाती है।"

आचार्य उदय

मूलभूत आवश्यकताएं

"शान्ति, सौहार्द्र, भाईचारा, मिलनसारिता सदभावनापूर्ण आचरण मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं हैं।"

आचार्य उदय

संपत्ति

"भ्रष्टाचार पाप कर्मों से अर्जित संपत्ति निसंदेह इंसान को धनाढय बनाती है किन्तु यही संपत्ति परिजनों को संस्कार विहीन भी बना देती है।"

आचार्य उदय

सच्ची मित्रता

"सच्ची मित्रता वह नहीं जो मित्र की पुकार का इंतज़ार करे, सच्ची मित्रता तो वह है जो चीख सुनने पर ही मदद को दौड़ पड़े।"

आचार्य उदय

मित्रता

"मित्र बनना अथवा बनाना सहज सरल है किन्तु मित्रता का निर्वहन कठिन है।"

आचार्य उदय

घमंड

"घमंड में चूर व्यक्ति सदैव ही स्वयं को श्रेष्ठ समझता है किन्तु वह यह भूल जाता है कि श्रेष्ठता घमंड से कोसों दूर होती है।"

आचार्य उदय

पारदर्शी

"सच का एक रूप पारदर्शी होना भी है जो होता तो अक्सर सामने है पर दिखाई नहीं देता।"

आचार्य उदय