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आचार्य जी
जाति, धर्म, संप्रदाय से परे है मानव धर्म ......... मानव धर्म की ओर बढते कदम !
चापलूसी व जी-हुजूरी
"
चापलूसी
व
जी
-
हुजूरी
के
माध्यम से भी शिखर पर पहुँचना संभव है इसके
लिए
इंसान
का
ईमानदार
व
मेहनतकश
होना
आवश्यक
नहीं
है
।"
आचार्य
उदय
सरल व सहज
"छल, कपट, बेईमानी जैसे कठिन मार्ग पर चलकर इंसान को जीतने का प्रयास करने से बेहतर है प्रेम व समर्पण रूपी मार्ग पर चलकर इंसान को जीतना सरल व सहज है।"
आचार्य उदय
ऊर्जा
"मन की भावनाएं सदैव ऊर्जावान होती हैं हमें ऊर्जाओं में समाहित शक्तियों को पहचान कर ग्रहण करने के लिए एकाग्रचित होने की आवश्यकता है।"
आचार्य उदय
ऊर्जा
"उत्साह व जिज्ञासा जीवन में अत्यंत आवश्यक हैं जो नियमित ऊर्जा का संचार बनाए रखने में सहायक व उपयोगी हैं।"
आचार्य उदय
शान्ति
"शान्ति का संबंध मांसिक संतोष से है शान्ति के लिए धन, संपदा, बैभव का होना आवश्यक नहीं है।"
आचार्य
उदय
चरमोत्कर्ष
"नाम,यश,कीर्ति, सुख,सम्रद्धि,धन,बैभव,संपदा का संगम सफलता का चरमोत्कर्ष है।"
आचार्य
उदय
भ्रष्टाचार
"मैं जैसे जैसे भ्रष्टाचार की सीमाएं तोड़ रहा था ठीक वैसे वैसे ही मेरे परिजन शिष्टाचार की मर्यादाएं तोड़ रहे थे, अंत में मैंने पाया कि दौलतें व बच्चे दोनों ही मेरे हाथ से निकल गए।"
आचार्य उदय
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